गुरुवार, अगस्त 30, 2018

बुधवार, अगस्त 29, 2018

महफ़िल जब भी सजेंगी

महफ़िलें जब भी सजेंगी
तेरी मौजूदगी हमें खलेगी
ज्ञान और किताब की बात जब चलेगी
समाज में तेरी याद ताज़ा होगी
विज्ञान और गणित खोजता रहा
बच्चों की मुस्कुराहट में तेरी झलक
ख़ैरात को अधिकार तक ले जाना
कब आम आदमी की बात
संविधान में दर्ज होगी
सपना ख़रीदना और बाज़ार में बेचना
समाज की बात
ज्ञान-विज्ञान विद्यालय में होगी
नवादा से समालखा तक का सफ़र
बीहड़ों में ज्ञान की रौशनी होगी
गंगा और नर्मदा का जल लेकर
भोपाल का बड़ा तलाब और
झीलें लहराई होगी
कश्मीर की वादियों में तेरा बचपन
केरल को तेरी याद हमेशा आती रहेगी
साक्षरता भूख विज्ञान और शिक्षा
जब तक रहेगी तेरी मौजूदगी रहेगी।

-डॉ विनोद रायना को समर्पित
Kagaz Ki Talash: कागज़ की तलाश

जागो बहनो


बहनो जागो उठो
बढ़ो लगाओ आवाज़
एक लम्बी लड़ाई
हमें जो लड़नी है
यह धर्म के ख़िलाफ़ नहीं है
यह तो मानवता है
मानव आज
इन्सान बनने में महँगा हो गया है
तुम्हारे पास जज़्बात तो बहुत है
क्योंकि यह जज़्बात नहीं
यह तो मानव देह पर झेला है
लेकिन तुम्हारी आवाज़ में धार नहीं है
जो जला सके तीली
उठा सके धुआँ
अभी तुम्हें बहुत दूर जाना है
यह तो पहली सीढ़ी है।

#कागज़कीतलाश