रविवार, जनवरी 19, 2020

दरख़्त

बड़े पेड़ों के साथ
छोटे का अस्तित्व नहीं होता
होता है केवल होता
वो एक छोटा सा पौधा
राष्ट्रीय पेड़ों में पौधें की गिनती कहाँ है
पौधे जो अस्थिर है
मौसमी है बरसाती है
पेड़ तो दरख़्त है
देश के स्तर के है
बड़े पेड़ का पत्ता भी भारी होता है
पौधे की तो जड़ें भी छोटी होती है
वर्षों गुज़ार कर आये है लोगों के साथ
तुम्हारा तो कल जन्म हुआ है तब
जब बड़े पौधे यहाँ से म्युजियम चले गये
तुम्हें किसी ने लगाया नहीं है जो तुम
एक दरख़्त एक पेड़
एक महान कहलाओ
छोटा पौधा मुँह उठाये ताकता रहता है
शायद मेरी भी दुआ सलाम हो जाए
हो ना हो कुछ इनका पोषण मुझे मिले
और में भी एक पेड़ हो जाऊ इसी
उम्मीद में वह खटता रहता है
सहता रहता है पतझड़ का बोझ।

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