रविवार, जनवरी 19, 2020

काम (Labour)


किसको काम चाहिए
क्या काम चाहिए
कौन तय करता है
काम का होना न होना
किसकी उपस्थिति
कौन अनुपस्थित
मैदान में कौन उतरना चाहता है
कब किसको लांच किया जाता है
ये सब भाग्य के भरोसे नहीं होता
यह तो एक खेल है
जिसमें मोहरे नहीं दिखते लेकिन
चालें बड़ी शातिर ढंग से चली जाती हैं
यहाँ तबादला इन्सानों का नहीं
कुर्सियों का किया जाता है
पुरानी नोटिंग फाड़कर
नये सिरे से नया पृष्ठ जोड़कर
तुरन्त प्रधान सचिव के हस्ताक्षर करा लो
कल तबादला हो गया
मर गया
फिर ससुर कोई नहीं पूछता
इस देश में
नहीं तो फिर दोबारा से
कुर्सी का तबादला कराना होगा
कल तक गिर गयी सरकार तो
फिर पाँच साल बेरोज़गारी का झंडा
हमारी पार्टी के लिए चंदा
बस ज़िन्दाबाद
मुर्दाबाद की आवाज़ बुलन्द
फिर इंतज़ार काम के लिए। 

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