बुधवार, जनवरी 29, 2020

Education ( शिक्षा )

शब्दों का जंजाल है,
सदियों से बेहाल है,
शिक्षा राजनीति है,
यह भी एक मुददा है।
समाज के कुछ ठेकेदारों ने,
बाँधा है पुलिंदा,
मुट्ठी भर ही तो क़लमकार है,
लिखते जो दुनिया की तक़दीर है।
जब-जब भी क़लम चलती है,
हमेशा वह ग़रीब पर भारी पड़ती है,
थके हुए मन को रूके हुए तन को,
न कभी मिल पाया है,
इन शब्दों का सहारा।
वो कहते है शिक्षा क्या है?
ये कहते है परिवर्तन क्या है?
हम कहते है ज़रूरतें क्या है?
शिक्षा बेचारी कुछ नहीं कहती,
क्योंकि शिक्षा एक राजनैतिक मुददा है,
और राजनीति समाज पर भारी है,
हम समाज के परिवर्तन की बात करते हैं,
शिक्षा और राजनीति की नहीं।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Please do not enter any span link in the comment box.