सोमवार, जनवरी 20, 2020

ताज महल कैसे बना है : Taj Mahal

ताज
चार सौ वर्ष पहले की बात है भारत में एक राजा था। वह तृप्ति नदी के किनारे बुरहानुपर में रहता था उसकी रानी चाँद की तरह सुन्दर थी। वह उसको देखे बिना भोजन भी नहीं करता था। वह राज-काज में पूरी सहायता करती थी। दीन-दुखियों को दान दिलाया करती थी, अनाथ बालिकाओं की शिक्षा व विवाह का प्रबन्ध करती थी।


सभी राज-काज के कामों में रूचि लेती थी। एक दिन राजा को स्वप्न आया कि उसकी रानी की मृत्यु हो गई। उसको समुद्र पार जौनावादी बाग में दफना दिया गया। राजा शयन कक्ष में ही सप्ताह तक लेटा रहा। राज दरवार में जाना भी भूल गया उसे ऐसा लगा जैसा उसका जीवन ही समाप्त हो गया हो, तभी एक परी आसमान से उत्तर कर आयी और कहने लगी, हे राजन क्यों चिंता में डूबे हो। राजा ने कहा मेरी रानी का स्वर्गवास हो गया है अतः मैं संन्यास लेना चाहता हूँ।
परी ने कहा,  आप संन्यास ले लेंगे, मगर इस राज्य की प्रजा का क्या होगा, कौन करेगा इनका पालन पोषण, आपको राज्य में ही रहना पड़ेगा । हे! राजन एक उपाय है जिससे आपकी परेशानी दूर हो सकती है।’
राजा एक दम चकित हो गया और कहने लगा हे परी मुझे वह उपाय बताओं में अपनी रानी के लिए कुछ भी करने को तैयार हूँ।’
परी ने कहा तुम्हारे पास वाले राज्य का राजा है जयसिंह, उसके राज्य से यमुना नदी गुजरती है जो कि एक बड़ी नदी है उसके किनारे एक जगह का नाम आगरा है अगर तुम उस जगह पर एक भवन का निर्माण करा दोगे तो तुम्हारी रानी की आत्मा को शान्ति मिलेगी तुम्हारी परेशानी भी दूर हो जायेगी और परी ने अपनी पोटली में से एक छोटा सा चमकता महल निकाल कर दिखाया और फिर वहाँ से गायब हो गयी।
राजा घबराकर उठ बैठा, उसने चारों ओर देखा सब कुछ ठीक था वह  फिर सो गया सुबह उठा मगर उसने अपना स्वप्न किसी को नहीं बताया बस उसके बारे में सोचता ही रहा। सुख चैन से दिन गुजरते रहे। राज-काज अच्छा चलता रहा चारों और राजा की प्रतिष्ठा थी। धन से सम्पन्न था चारों तरफ सुख वैभव के गीत गाये जाते थे, हर तरह के कारीगरों की इज्जत होती थी एक दिन जब राजा अपनो कक्ष में था तो उसकी बड़ी लड़की जहाँनारा राजा के पास आयी और कहने लगी अब्बा आपको अम्मी ने बुलाया है। राजा उठकर रानी के कमरे में गया। रानी ने एक कन्या को जन्म दिया था। वह अचेत सी अवस्था में सोई थी राजा ने अपनी रानी के माथे पर हाथ रखा। उसका शरीर ठंडा हो चला था, राजा हाथ लगाते ही रानी ने आँखें खोली और बुदबुदाते हुए संतानों की देख-भाल का दायित्व राजा को सौंपा। और उसने अन्तिम बिदा मांगी। राजा ने जब तक वैध, हकीमों को बुलाया तब तक रानी उसे छोड़कर सदा के लिए चली गयी। उस समय रानी की आयु उन्तालीस वर्ष थी और राजा की चालीस। राजा शोकाकुल हो उठा और एक सप्ताह बिलखते बीत गया। जब राजा को होश आया तो उसे परी के बात याद आयी। उसने परी की बात पर अमल करना शुरु किया। सबसे पहले राजा जय सिंह से भवन के लिए जगह का प्रस्ताव रखा। जो राजा ने संदेश पाते ही मंजूर कर लिया। राजा ने दिल्ली से उस्ताद परीरा बढ़ई को बुलाया जिसने राजा के बताने पर छोटे सा लकड़ी का एक महल बनाया। वह ऐसा ही था जैसा परी ने दिखाया था। राजा बड़ा प्रसन्न हुआ। उसने अब निर्माण के लिए एक लिपि लेखक, एक राजगीर, दो शिल्पी एवं एक गुंबद निर्माता को बुलाया।
निर्माण सामग्री कई स्थानों से मंगाई गयी। सफेद चमकते पत्थर मकराना से, लाल रेतिले पत्थर फतेहपुरी की पहाड़ियों से और कुछ रंग-बिरगें बहुमूल्य पत्थर संसार के कोने-कोने से मंगाये गये, निर्माण कार्य में बीस हज़ार  राजगीर काम पर लगाये। इसको बनाने में पचास लाख रूपये की लागत आयी और महल 22 वर्ष में बनकर तैयार हुई। राजा बहुत प्रसन्न हुआ उसका स्वप्न पूरा हो चुका था उसने जैनावादी बाग से पत्नि की कब्र को उठवाकर इस इमारत के बीचो-बीच दफनवा दिया और फिर उसने एकान्त में बैठकर परी को याद किया।
 हे! परी मैंने तुम्हारी इच्छा पूरी कर दी तुम कम से कम एक बार आकर देख लो। वह राजा के साथ उसको देखने लगी। रात का समय था इमारत चाँदनी रात में चाँद की तरह चमक रही थी अतः परी भी भाव विभोर हो गयी। कहने लगी- हे! राजन अब तुम्हारी रानी बहुत खुश होगी। इसका नाम ‘‘ताजमहल’’ इतना कह कर परी गायव हो गयी और राजा ने इसका नाम ‘‘ताजमहल’’ रख दिया और सारा संसार इसे ‘‘ताजमहल’’ एक अजूबा के नाम से जानता है।’’

4 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज मंगलवार 28 जनवरी 2020 को साझा की गई है...... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

    जवाब देंहटाएं
  2. शुक्रिया सुशील कुमार जोशी जी।

    जवाब देंहटाएं

Please do not enter any span link in the comment box.