सोमवार, फ़रवरी 17, 2020

नीम

तुम पढ़े तो नहीं नीम,
फिर ये गुण कहाँ पाये,
कौन सा विश्वविद्यालय है,
जहाँ से तूने,
गट्ठर बाँधा औषधियों का,
मगर तूने ये कड़वाहट,
क्यों है पायी,
सीमित रखता तू अपने को,
अच्छा तरहा पल रहा था,
नदी के तट के किनारे,
हाँ! तू अभी इतना तो नहीं,
जाना होगा कि,
तेरी रगों में कौन सा ख़ून है,
हाँ! ख़ून, ख़ून है,
तू सिमट कर,
रह क्यों नहीं जाता,
अपनी ही परिधि में,
तुझे न क्यों पतझड़ आया,
न बहार की मंज़िल तू हो सका,
हाँ ! तू बस अपने में ही,
क्रोधित है क्रोध से।

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