शनिवार, फ़रवरी 08, 2020

वजूद को तौलना चाहता हूँ

उसके शबाब के वजूद को तौलना चाहता हूँ,
इमारतों को ज़मीदोज़ होते देखना चाहता हूँ।

इस मंच पर बैठे लोगों में समानता नहीं है,
पिछली पंक्ति के बैठे लोगों को बदलना चाहता हूँ।

वो जाने क्या-क्या बोलना चाहता है आज,
एक बात से दूसरी बात को जोड़ना चाहता हूँ।

वो बच्चों की संख्या पर बात करना चाहता है,
’मैं’ शिक्षा के तरीक़ों पर बात करना चाहता हूँ।

उसने सबके लिये अलग-अलग समूह बनाये हैं,
बच्चों को शिक्षा की सुविधा कराना चाहता हूँ।



तुम इंसानों को मरने-मारने की बात कब करोगे,
मुल्क के विकास के लिए काम करना चाहता हूँ।

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