शुक्रवार, मार्च 06, 2020

अदृश्य ऋतु

ओ री!
अदृश्य ऋतु,
आच्छादित ऋतु,
कब उजागर होगी,
तू पार क्षितिज के,
विस्तृति होगी,
कौन दिवस होगा,
जो बढ़ती-बढ़ती,
बहके क़दमों से,
शिथिल जीवन को,
तू दे पायेगी,
अपार संचित वो मुद्रा,
कितना जोड़ा होगा,
क्या-क्या संजोया होगा,
एक तेरे जीवन का,
मधुरस रस मधु होगा,
किस अम्बर में,
फैली होगी निर्मल छाया,
कौन दिशा की तुम वासी,
कौन है तेरी प्रिय सखी,
ओ री अद्रश्य ऋतु,
आच्छादित ऋतु।

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