बुधवार, मार्च 25, 2020

लॉकडाउन

इन्सान ने जंगलों में पहले घर क्या बनाया,
फ़िर कुटुंब को मिलकर एक मोहल्ला बसाया,
सबने मिलकर गाँव खड़ा किया अपने तरीक़े से,
गाँव तक तो गनीमत थी इन्सान के विकास की,
इन्सान, जानवर और कुत्ते एक साथ रह सकते है।  



इंसानों ने सभ्य होने के लिए एक शहर क्या बसाया,
सब कुछ बदल डाला मशीन के हवाले कर दी ज़िन्दगी,
इन्सान ने खूद को खूद से आज कितना दूर कर किया,
जंगल में भी कुदरत का खेल इन्सान ने कई बार देखा है,  
शहर ने तो कई बार इन्सान की तक़दीर बदलकर रख दी है।  

लोगों ने शहर में इलाज़ का दवाखाना क्या बनाया,
अब गाँव जा रहें हैं भीड़ से अलग-थलग होने के लिए,
सवाल उनकी ज़िन्दगी का है आखिर हम बचें तो कैसे,
किसको छू सकता हूँ मैं आज बिना डर और भय के,
लालच ने इंसानियत की सारी हदों को पार कर दिया है।

कुत्ते, बिल्लियाँ, गधे, घोड़े, गाय, भैस जाने कौन-कौन,
जंगल से बस्ती फ़िर बस्ती से गाँव और शहर चले आये,
यह बेचारे जीव अब लॉकडाउन की स्थिति में क्या करें,
क्या कोई इनके खाने के बारें में भी विचार करेगा आज,
जंगली मित्रों पर इन्सान सदियों से निर्भर रहा हैं और रहेगा।

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