शुक्रवार, अप्रैल 10, 2020

'मैं' रोटी खोजता रहूँ

तुम दर्द की कविता लिखों,
'मैं' दर्द को सहता रहूँ,
जन्म से मृत्यु का सफ़र,
तेरे लिए गीत होगा,
अभाव में खोजता रहा,
कहीं कोई आसरा मिलें,
तुम उसमें लय खोजों,
साँस भी कर्ज़ की है,
फेफड़ें छोटे होते गये,
काम पर दम फूलता रहा,
तुम सुर तलाशते रहो,
'मैं' बाज़ार की वस्तु,
फ़िल्म का किरदार,
सरकार की योजना हूँ,
तुम उम्मीद भर रखो,
'मैं' रोटी खोजता रहूँ,












काम के लिए मारा फिरना,
ख़ाली हाथ दर-ब-दर फिरना,
तुम मन की बात करो,
लिपि धर्म के इर्द-गिर्द,
शब्द हो गये सांप्रदायिक,
धर्म स्थान किसके है,
तुम समानता की बात करो।

4 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज शनिवार 11 एप्रिल 2020 को साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. शुक्रिया दोस्तों

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  3. यथार्थ पर शानदार हृदय स्पर्शी सृजन।

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  4. शुक्रिया आपका जी

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