मंगलवार, मई 26, 2020

सचिवालय

माथे को पीटता वो इंसान,
सुबह से मक्खी मारता,
दोपहर बाद ही सारी फ़ाइलों का आना,
कमवक़्त,  सुबह से एक ही फ़ाइल थी,
वो भी सहकारी वालों की,
राजेंद्र बाबू पाँच बजने वाले हैं,
ज़रा जल्दी करो ....
और निकालता है एक लेटर हेड,
“मंत्री मण्डल सचिवालय ...”
लगता है उसको फिट करने,
जर्मन की देन है ये टाइपराइटर,










लगता है खटा खट करने,
नाक-भौ चढ़ा कर कहता है,
विषय में घटनोत्तर नहीं लिखा,
मैं, बड़े आदर भाव से कहता हूँ,
श्रीमान, कंडिका नौ में लिखा है,
शिक्षा विभाग है, क्या कच्छा विभाग,
भाषा तक नहीं लिख पाते आप लोग,
न प्रदेश सरकार लिखा है,
ओर ये शुद्धि,
छः महीने पहले हो गयी थी,
अगली बार से ध्यान रखना,
मैंने बड़ी कृतज्ञता के साथ कहा,
धन्यवाद ....
और सचिवालय से ऐसे निकला,
जैसे ओलम्पिक का गोल्ड मेडल।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Please do not enter any span link in the comment box.