शुक्रवार, मई 01, 2020

भूख के लिए विश्व युद्ध

तीसरे विश्वयुद्ध की,
शुरूआत हो रही है,
समझौतों के बंड़ल,
जेब में डालो,
और करो परीक्षण,
कश्मीर या रवांडा में,
समुन्द्र और एकान्त बचा नहीं,
हो सके तो,
कहीं घनी आबादी में,
बम्ब फोड़कर देख लो,








इन्सानी ज़िस्म के दर्द को,
बारूद में ठंड़ा कर लो,
तुम सफ़ेद पोशाक पहनकर,
आये दिन विश्व सम्मेलन करो,
एक ओर है धर्म की धर्मावली,
धैर्य तो है नहीं,
ख़ून ही ख़ून का दुश्मन,
रंग रंग में भेद है,
काश् विश्व की बेड़ियाँ,
सीमाएं मिटा दी जाय,
सुरक्षा का बल ही,
इन्सान की असुरक्षा है।

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