शनिवार, जून 27, 2020

विद्यालय प्रबन्ध समिति


विद्यालय प्रबन्ध समिति की संरचना कैसी है?
शिक्षा के अधिकार में समुदाय की सक्रिय भागीदारी की परिकल्पना की गयी है। विद्यालय प्रबंध समिति के माध्यम से अभिभावकों की विशेष भूमिका और दायित्व तय किये गये हैं। शिक्षक का दायित्व है कि विद्यालय प्रबंध समिति के सदस्यों को समय-समय पर विद्यालय की कार्यप्रणाली और विभिन्न प्रावधानों, आदि पर जागरूक करें और जोड़ने का प्रयास करें जिससे विद्यालय में एक बेहतर प्रबंधन व्यवस्था से संबंधित मुद्दों पर काम करने के लिये विद्यालय प्रबंध समिति एवं शिक्षक एक साथ मिलकर काम कर सकें।
संरचना एवं गठन
निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 21 के तहत प्रत्येक विद्यालय में एक विद्यालय प्रबन्ध समिति गठित की जाएगी। उत्तर प्रदेश निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार नियमावली, 2011 के अनुसार समिति में कुल 15 सदस्य होगें। 15 सदस्यों में से 11 सदस्य विद्यालय में दाखिला प्राप्त बच्चों के माता-पिता होगें और चार नामित सदस्य होगें। समिति के कुल सदस्यों में से कम से कम 50 प्रतिशत महिलाएं होंगी।
चार नामित सदस्य निम्नलिखित होगें-
1.    स्थानीय प्राधिकारी (पंचायत) द्वारा नामित सदस्य,
2.    एक सदस्य सहायक नर्स एवं मिड वाईफ (ए0एन0एम0),   
3.    एक लेखपाल (जिला मजिस्ट्रेट द्वारा नामित)
4.    विद्यालय के प्रधानाध्यापक विद्यालय प्रबन्ध समिति के सचिव।
Ø  विद्यालय प्रबंध समिति के 11 सदस्यों में एक-एक सदस्य अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जन जाति, अन्य पिछडा वर्ग तथा कमजोर वर्ग के बालक के माता-पिता होंगे।  
Ø  विद्यालय के शिक्षक विद्यालय क्षेत्र के दायरे में सभी अभिभावकों की खुली सभा में भागीदारी के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार करेगें व बैठक का स्थान, दिनांक तय करें। बैठक के दिन सभी अभिभावकों को बैठक के उद्देश्य बताते हुए विद्यालय प्रबंध समिति सम्बन्धी शासनादेश के प्रमुख बिन्दुओं से अवगत करायेगें।
Ø  विद्यालय प्रबंध समिति के 11 सदस्यों का बैठक में आम सहमति से चुनाव किये जाने के उपरान्त, चयनित 11  सदस्यों द्वारा अपने साथियों में से एक अध्यक्ष एवं एक उपाध्यक्ष का चुनाव आपसी सहमति से करेगें।
Ø  विद्यालय प्रबन्ध समिति समुदाय के अपवंचित वर्गों, यथा- महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, मजदूर, किसान, पिछड़ों को समुचित प्रतिनिधित्व दिया जाएगा।
Ø  प्रारम्भिक शिक्षा के विकास में अभिरुचि रखने वाले समर्पित एवं समय देने वाले व्यक्तियों को इसमें शामिल होने का अवसर दिया जाएगा।
Ø  विद्यालय प्रबंध समिति की बैठकों  में गांव में निवासरत् सेवानिवृत्त शिक्षक अथवा अन्य विभाग से सेवानिवृत्त अधिकारी/कर्मचारियों को सम्मिलित किया जाय जिससे विद्यालय के विकास में उनका महत्वपूर्ण योगदान लिया जा सके।    
विद्यालय प्रबन्ध समिति का कार्यकाल कितने वर्ष का होता है?
Ø  विद्यालय प्रबंध समिति का कार्यकाल दो वर्ष का होता है। दो वर्ष बाद समिति का पुनर्गठन किया जायेगा।
Ø  प्रत्येक वर्ष विद्यालय प्रबन्ध समिति के अभिभावक सदस्यों को (बच्चों द्वारा विद्यालय छोड़ने की स्थिति में) शामिल करने हेतु अद्यतन किया जायेगा।
Ø  विद्यालय प्रबन्ध समिति के अध्यक्ष बदल जाने की स्थिति में अथवा प्रधानाध्यापक के स्थानान्तरण की स्थिति में खाता संचालन में यथा आवश्यक संशोधन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की अनुमति से किया जायेगा।
विद्यालय प्रबंध समिति के कार्य क्या-क्या होय है?
Ø  06 से 14 वर्ष के सभी बालक/बालिकाओं का शत-प्रतिशत नामांकन एवं नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना।
Ø  यह सुनिश्चित करना कि सभी अध्यापक और छात्र विद्यालय में नियमित रूप से समय पर आये।
Ø  विद्यालय न जाने वाले तरीकों के बारे में जानकारी लेना और देखरेख करना।  
Ø  विद्यालय से बाहर के बच्चों का आयु संगत कक्षा में नामांकन कराना तथा ऐसे बच्चों के लिए विशेष प्रशिक्षण की व्यवस्था करना और इसकी गुणवत्ता की देखरेख करना।
Ø  विद्यालयों में नामांकन बढ़ाने हेतु ग्राम प्रधान, विद्यालय प्रबन्ध समिति, माँ समूह एवं स्थानीय लोगों का सहयोग प्राप्त करना।
Ø  विशेष प्रशिक्षण की व्यवस्था हेतु विद्यालय के प्रधानाध्यापक तथा विद्यालय प्रबन्ध समिति के अध्यक्ष की जिम्मेदारी है।  
Ø  विद्यालय प्रबन्ध समिति की मासिक बैठक में विशेष प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे बच्चों की उपस्थिति पर विचार-विमर्श विशेष रूप से किया जाये और अनियमित रूप से उपस्थित रहने वाले बच्चों को, नियमित रूप से विद्यालय भेजने हेतु विद्यालय प्रबन्ध समिति का सहयोग लिया जाये।
Ø  इस सम्बन्ध में विद्यालय प्रबन्ध समिति की बैठक की कार्यवाही रजिस्टर में अनिवार्य रूप से दर्ज़ की जाये।
Ø  बच्चों को बिना भेदभाव व भय के शिक्षा का अधिकार न मिलने पर स्थानीय प्राधिकारी को सूचित करना। 
Ø  विशिष्ट आवश्यकता वाले (दिव्यांग) बच्चों का नामांकन कराना तथा प्रारम्भिक शिक्षा पूरी होने तक इनकी सुविधाओं एवं भागीदारी की देखरेख करना।
Ø  यह सुनिश्चित करना कि अध्यापक अभिभावकों की नियमित बैठक कर बच्चों की उपस्थिति एवं सीखने की प्रगति के बारे में उन्हें बतायें।
Ø  मध्याह्न भोजन की नियमितता एवं गुणवत्ता का ध्यान रखना।
Ø  बच्चों के अधिकार एवं शिक्षा का अधिकार अधिनियम के बारे में आस-पास के लोगों को बताना तथा विद्यालय में अधिनियम के मानक के अनुसार सुविधाएं एवं कार्य हों, इसकी देखरेख करना।
Ø  अध्यापकों पर जनगणना, चुनाव, आपदा राहत को छोड़कर अन्य गैर सरकारी कार्यों का भार न हो।
Ø  विद्यालय को मिलने वाले अनुदान का सही तरीके से उपयोग किया जाए, इसकी देखरेख करना तथा विद्यालय प्रबन्ध समिति को मिलने वाली धनराशि का अलग से हिसाब-किताब रखना।
Ø  शासन के पत्र संख्या 2223/79-5-2012-29/09 टी.सी.-11 दिनांक 6 जुलाई 2012 के अनुसार विद्यालय प्रबन्ध समिति के अध्यक्ष एवं पदेन सदस्य सचिव (प्रधानाध्यापक) के हस्ताक्षरों से संयुक्त खाते का संचालन करना, तथा टीचर ग्रान्ट, निर्माण कार्य, मेन्टेनेन्स ग्रान्ट, विद्यालय ग्रान्ट, यूनिफार्म एवं अन्य कार्यो पर व्यय विद्यालय प्रबन्ध समिति के माध्यम से ही वित्तीय नियमों के अनुसार करना। 
Ø  तीन साल के लिए विद्यालय विकास योजना बनाना एवं योजना को अध्यक्ष/उपाध्यक्ष एवं सदस्य सचिव के हस्ताक्षर के साथ सम्बन्धित प्राधिकारियों के पास भेजना।
Ø  प्रत्येक माता-पिता या अभिभावक का यह कर्तव्य होगा कि वह अपने बच्चे या आश्रित का दाखिला पड़ोस के विद्यालय में कराये या कराने के लिए तैयार रहे, बच्चों को नियमित  विद्यालय भेजें, 3 वर्ष से अधिक और 6 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को जिस विद्यालय में पूर्व प्राथमिक शिक्षा का प्रबंध हो, वहाँ अपने बच्चों की देखभाल एवं पूर्व प्रारंभिक शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से दाखिला कराये और उपरोक्त के अतिरिक्त, विद्यालय प्रबंधन में सहयोग दें।
विद्यालय प्रबन्ध समिति का गठन कैसे होता है?
Ø  विद्यालय क्षेत्र के सभी अभिभावकों की खुली सभा में भागीदारी के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए।
Ø  पंचायत प्रतिनिधि व प्रधान, स्थानीय प्राधिकारी द्वारा विद्यालय क्षेत्र के दायरे में मुनादी के माध्यम से सभी को सूचित किया जाए।
Ø  बच्चों द्वारा उनके माता-पिता की भागीदारी हेतु संदेश भिजवाना जाए, जिसके लिए बच्चों की कॉपी में लिखकर संदेश भिजवाये और उस पर माता-पिता के हस्ताक्षर करा कर मंगावाये।
Ø  बैठक प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय के परिसर में ही रखी जाय।
Ø  यदि विद्यालय परिसर में स्थान कम हैं तो किसी भी सार्वजनिक स्थान का बैठक हेतु चयन किया जा सकता है।
Ø  बैठक की तिथि और समय का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाय जिससे बैठक में सभी वर्गों की सहभागिता सुनिश्चित हो सके।
Ø  प्रधानाध्यापक द्वारा विद्यालय प्रबन्ध समिति के गठन हेतु आयोजित बैठक का उद्देश्य सभी को बताया जाय।
Ø  विद्यालय प्रबंध समिति के गठन सम्बन्धी शासनादेश के प्रमुख बिन्दुओं से अवगत कराना।
Ø  सभी अभिभावक मिलकर 11 सदस्यों का चयन करेंगे। चयनित सदस्यों में से एक अध्यक्ष एवं एक उपाध्यक्ष का चयन करेंगे।
Ø  अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष में से एक महिला होना अनिवार्य है।
विद्यालय प्रबन्ध समिति की बैठक माह में कम से कम एक बार अनिवार्य रूप से आयोजित की जायेगी तथा बैठक की कार्यवाही एवं लिये गये निर्णयों को विद्यालय प्रबन्ध समिति बैठक रजिस्टर में अवश्य लिखा जाए। यह भी सुनिश्चित कर लिया जाए कि बैठक में उपस्थित सभी सदस्यों के हस्ताक्षर रजिस्टर में कराये जायें।
Picture form Sitapur


विद्यालय प्रबन्ध समिति बैठक रजिस्टर


विद्यालय प्रबन्ध समिति बैठक रजिस्टर क्या है

निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार नियमावली 2011 में विद्यालय प्रबन्ध समितियों से यह अपेक्षा की गयी है कि माह में न्यूनतम एक बार विद्यालय प्रबन्ध समितियों की बैठक अवश्य होगी और बैठकों में लिए गये निर्णय व कार्यवृत का अभिलेखीकरण होगा तथा सार्वजनिक किया जायेगा। इस अपेक्षा को ध्यान में रखते हुए विद्यालय प्रबन्ध समिति बैठक रजिस्टर को विकसित किया जाता है। रजिस्टर बनाते समय इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए।

 विद्यालय प्रबन्ध समिति के सदस्यों को बैठकों में चर्चा करने निर्णय लेने व उसे सार्वजनिक करने में सहूलियत हो। विद्यालय प्रबन्ध समितियों के कार्यकाल के दृष्टिगत रजिस्टर दो वर्ष के लिए तैयार जाता है ताकि विद्यालय प्रबन्ध समिति द्वारा दो वर्षो में किये गये कार्यों का अभिलेख तैयार हो सके। रजिस्टर विद्यालय प्रबन्ध समिति (एस.एम.सी.) (School Management Committee - SMC) सदस्यों को यह अवगत करायेगा कि गत माह में हमने क्या निर्णय लिये और उनके सापेक्ष कार्य कर सके और आगामी माह के लिए हमने कौन-कौन से कार्य निर्धारित किये है। यह अभिलेख कृत कार्या की समीक्षा एवं आगामी कार्यो के नियोजन में मदद करेगा। यह रजिस्टर बैठक में एजेण्डा तय करने व एजेण्डावार चर्चा को आगे बढ़ाने में एक मार्गदर्शिका का कार्य करता है तथा कुछ ही समय में समिति के सदस्य बैठक करने की प्रक्रिया व तरीकों से भी अवगत हो जाते है। 
इसके अतिरिक्त रजिस्टर में अभिलिखित निर्णय जिम्मेदारियां आदि एस.एम.सी. की सहभागिता व सामूहिक प्रयास का एक पुख्ता उदाहरण होगा। इससे प्रबन्ध समिति के सदस्य अपने कार्यों की समय-समय पर समीक्षा कर सकेंगे, आम सभा, अभिभावकों की बैठक व सोशल आडिट में इसके माध्यम से अपने कार्यों का लेखा-जोखा प्रस्तुत कर सकते है।

रजिस्टर में निम्नवत् मुख्य बिन्दु सम्मिलित किये जाए -
·     विद्यालय प्रबन्ध समितियों के सभी सदस्यों का विवरण
·     प्रत्येक महीने के लिए अनिवार्य एजेण्डा बिन्दु व अन्य चर्चा के बिन्दुओं का विवरण
·     महीने की मुख्य गतिविधियों का विवरण
·     बैठक में की गयी चर्चा व मुख्य निर्णय
·     अनियमित उपस्थिति वाले बच्चों की सूची व उन्हें नियमित रूप से विद्यालय जाने के लिए एस.एम.सी.  के सदस्यों द्वारा किया जाने वाला प्रयास।

विद्यालय प्रबन्ध समिति बैठक रजिस्टर के प्रयोग के तरीकेः-
बैठक से पूर्व तैयारीः-
·   एस.एम.सी.  के सभी सदस्यों की राय से बैठक की तिथि, दिन व समय एवं स्थान तय हो।
·  बैठक की तिथि की जानकारी कम से कम तीन दिन पूर्व बच्चों के माध्यम से सदस्यों तक पहुँचाये। यह सुनिश्चित करें कि समिति के सभी सदस्यों को बैठक की सूचना पहुँच गयी है तथा वे बैठक में आने के लिए तैयार हो।
·  बैठक से पूर्व समिति के सदस्यों के बैठक का स्थल निर्धारित कर उनके बैठने की व्यवस्था कर लें।
·  बैठने की व्यवस्था ऐसी हो कि सभी सदस्य गोल घेरे में बैठे ताकि वे ठीक से बोल सकें व एक दूसरे की बातें सुन सकें।
बैठक करते समयः- सर्वप्रथम सभी सदस्यों का स्वागत किया जाये। बैठक का संचालन सदस्य सचिव द्वारा किया जाये तथा समिति के अध्यक्ष की सहमति से प्रारम्भ किया जाये। अध्यक्ष यदि किसी कारणवश अनुपस्थित है तो उपाध्यक्ष द्वारा अध्यक्षता की जाये।
·  विद्यालय प्रबन्ध समिति की प्रथम बैठक में उनके द्वारा किये जाने वाले कार्यों को पढ़कर चर्चा की जाए ताकि समिति के सदस्य अपने कार्यों को भली-भाँति समझ सकें। आवश्यकता पड़ने पर बीच-बीच में भी इस विषय पर चर्चा करते रहे।
·  बैठक की शुरूआत में गत माह की बैठक का निर्णय व उस पर की गयी कार्यवाही सदस्य सचिव द्वारा पढ़ी जाये। यदि कार्यवाही के कुछ बिन्दु अवशेष हो तो उन्हें लिख लिया जाये।
· उसके उपरान्त बैठक का एजेण्डा बिन्दु एक-एक करके पढ़ा जाये तथा उस पर चर्चा की जाये। चर्चा में सभी सदस्यों की राय व सहमति सुनिश्चित करते हुए एजेण्डा वार चर्चा के बिन्दु लिखे जाए
·  बैठक से पूर्व सदस्यों को यह भी बताया जाये कि बैठक का विद्यालय के लिए गाँव के बच्चों के लिए व सरकार के लिए क्या महत्व हैं साथ ही यह भी बताये कि समिति के सदस्य के रूप में उनकी सहभागिता अत्यधिक महत्वपूर्ण है।
· समिति के सदस्य यह भी जाने कि उनके द्वारा की जा रही चर्चा लिखी जा रही है तथा उनके द्वारा किये जाने वाले कार्य भी दर्ज किये जा रहे है।
·     बैठक का कार्यवृत्त लिखने के लिए समिति के कुछ पढे़-लिखे सदस्यों का सहयोग लिया जा सकता है।
·  बैठक करते समय बैठक में उपस्थित महिलाओं की सहभागिता का पूरा ध्यान रखा जाये।
·   एस.एम.सी. की बैठक में कम से कम 6 अभिभावकों सदस्यों की उपस्थिति आवश्यक है।
· प्रत्येक माह की बैठक की कार्यवाही (अभिलेख) पर उपस्थित सदस्यों के हस्ताक्षर या अंगूठे के निशान लिये जाएसमिति के सदस्यों द्वारा यदि कुछ विशेष व सराहनीय कार्य किये गये हो तो उनके कार्यो की सराहना कर उन्हें सम्मानित किया जाये।
·   बैठक के बीच-बीच में “अभियान गीत” अथवा कुछ प्रेरक कथाओं का वाचन आदि भी करते रहे साथ ही कुछ नवीन व महत्वपूर्ण निर्णयों की जानकारी दें।
·  विद्यालय की विशेषताओं उपलब्धियों व चुनौतियों पर भी चर्चा करें यदि विद्यालय द्वारा कोई नवाचार किया गया हो तो उसे भी अभिलेखित किया जाये।
· रजिस्टर के माध्यम से बच्चों की उपस्थिति को नियमित करने में मदद मिलेगी। अनुपस्थित बच्चों का नाम कक्षावार एवं माहवार रजिस्टर में दर्ज करना है।
·     एस.एम.सी. की बैठकों में बच्चों की अनुपस्थित पर चर्चा करना है।
· बच्चों की नियमित उपस्थिति की जिम्मेदारी एस.एम.सी. सदस्यों को दी जायेगी। एस.एम.सी. सदस्यों, बच्चों और अभिभावक का नाम रजिस्टर में दर्ज किया जायेगा।
·  एस.एम.सी. अपने सेवित क्षेत्र के सभी अभिभावकों के साथ बैठक और चर्चा करें कि वे अपने बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय भेजे और उनके साथ शिक्षा के महत्व पर चर्चा करें।
·  प्रत्येक माह की बैठक में दिये गये एजेण्डा- अनिवार्य चर्चा बिन्दु, सुझावात्मक चर्चा बिन्दु एवं विद्यालय की स्थानीय परिस्थतियों के आधार पर चर्चा करें। विद्यालय को प्राप्त अनुदान एवं खर्च तथा वित्तीय मुददों पर  प्रत्येक माह की बैठक के एजेण्डा में शामिल करें और चर्चा की जाए। 
·  एजेण्डा के आधार पर क्या-क्या कार्यवाही हुई, किन-किन बिंदुओं पर चर्चा हुई, क्या-क्या निणर्य लिये गये, बैठकों का फॉलोअप, नये मुद्दे, कठिनाईयाँ/परेशानियाँ, सुझाव और कार्यवाही को रजिस्टर में दर्ज किया जाए।
· विद्यालय के संबंध में प्रशासनिक एवं शैक्षिक शिकायतों पर चर्चा एवं कार्यवाही को दर्ज किया जाय।
· अध्यापकों द्वारा निश्चित पाठ्यक्रम का अनुश्रवण और बच्चों के सीख के स्तर पर अभिभावकों के साथ चर्चा की जाय।
·  एस.एम.सी.  की मासिक बैठक हेतु तिथि वर्ष भर के लिए निर्धारित हो यदि दिनाँक में परिवर्तन हो तो दर्ज किया जाए।
·   रजिस्टर के अन्त में कुछ चर्चा के बिन्दु दिये गये है जिन्हें बैठकों के दौरान बीच-बीच में पढ़कर सुनाये जाए

विद्यालय प्रबन्ध समिति के सदस्यों एवं समुदाय की भागीदारी से शिक्षा हेतु किये जा रहे प्रयास


बैठक के उपरान्तः-
·   कार्यवृत्त को एक बार पढ़ने के उपरान्त बैठक की समाप्ति की घोषणा अध्यक्ष द्वारा की जाए
·  बैठक समाप्त करने के उपरान्त सभी सदस्यों को सदस्य सचिव/प्रधानाध्यापक द्वारा धन्यवाद  दिया जाये व अगली बैठक की तिथि  की घोषणा की जाए प्रत्येक त्रैमाह अथवा छः माह में अभिभावकों की सभा बुलाकर अद्यतन कार्यवाही और प्रगति से अवगत कराया जाये।
·    वर्ष में एक बार आम सभा/खुली बैठक की जाय जिसमें बच्चों के अभिभावक, गाँव के लोग, गाँव पंचायत के प्रतिनिधि उपस्थित हो। रजिस्टर जन सुनवाई/आम बैठकों में तथ्यों के आधार पर प्रस्तुतीकरण हेतु प्रयोग करे।
·    एस.एम.सी. दस्तावेज़ के विश्लेषण के माध्यम से यह मालूम कर सकती है कि विद्यालय की पूर्व स्थिति एवं वर्तमान स्थिति में क्या बदलाव हुआ किन समस्याओं/मुददों का समाधान हुआ तथा भविष्य की रणनीति क्या होगी?
·  जिन समस्याओं को एस.एम.सी. स्वयं हल नहीं कर सकती है उन्हें बड़े समुदाय में, स्थानीय प्राधिकारी (पंचायत) एवं उच्च अधिकारियों को अवगत करना जा सकता है।

प्रारम्भिक शिक्षा और पंचायतीराज : उत्तर प्रदेश


·  एसएमसी की बैठकों का रजिस्टर स्वयं मूल्यांकन एवं वाह्य मूल्यांकन दोनों का एक प्रमाणिक माध्यम है।


विद्यालय प्रबन्ध समिति के सदस्यों एवं समुदाय की भागीदारी से शिक्षा हेतु किये जा रहे प्रयास

          निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा-21 (1) एवं उ0प्र0 निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार नियमावली 2011 के अन्तर्गत विद्यालयों में एस0एम0सी0 का गठन किया गया है। शासनादेश संख्याः1349/68-5-2016-29/2009टी.सी. दिनांक 31 अगस्त, 2018 द्वारा विद्यालयों में नवीन विद्यालय प्रबन्ध समिति का गठन करते हुए दिनांक 01 अक्टूबर, 2018 से क्रियाशील बनाये जाने हेतु निर्देश दिये गये है। (विभाग द्वारा SMC गठन हेतु विद्यालय को दिए गए आदेश की प्रति) प्रदेश के समस्त परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक एवं कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में विद्यालय प्रबन्ध समिति का गठन किया गया है।

        प्रदेश के समस्त परिषदीय एवं कस्तूरबा गाँधी बालिका विद्यालयों में शासनादेश द्वारा विद्यालय प्रबन्ध समिति की बैठक माह के प्रथम बुद्ववार को निर्धारित की गयी है, जिसके फलस्वरूप विद्यालयों में विद्यालय प्रबन्ध समिति की बैठकें नियमति रूप से आयोजित की रही हैं। विद्यालय प्रबन्ध समिति की बैठकों में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी, जिला समन्वयक, समस्त खण्ड शिक्षा अधिकारी, एम.आई.एस. इंचार्ज एवं लेखाकार द्वारा प्रतिभाग किया जा रहा है एवं बैठकों के संचालन में सहयोग तथा अभिभावकों को शामिल किया जा रहा है।

मिशन प्रेरणा के बारे में अधिक जानकारी के लिए पढ़ें

     विद्यालय प्रबन्ध समिति के सदस्यों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से ’प्रेरणा मिशन’ के अर्न्तगत प्रेरणा ऐप में एस.एम.सी. गतिविधि मॉड्यूल विकसित किया गया है। ऐप के माध्यम से एस0एम0सी0 सदस्य विद्यालय से सम्बन्धित गतिविधियों की फोटो अपलोड किये जा रहे हैं। विद्यालय प्रबन्ध समिति की बैठक से सम्बन्धित आयोजन का विवरण फोटोग्राफ सहित प्रेरणा पोर्टल के एस0एम0सी0 गतिविधि मॉड्यूल पर अपलोड किया जा रहा है। विद्यालय की गतिविधियों के बारे में सीधे समुदाय तथा जनपदीय एवं ब्लाक स्तरीय अधिकारियों द्वारा फीडबैक प्राप्त करने की मुहिम की शुरूआत हुई है।
    विद्यालय प्रबन्ध समिति के कर्तव्यों एवं दायित्वों के सम्बन्ध में जन समुदाय, माता-पिता, अभिभावकों एवं एस.एम.सी. के सदस्यों को जागरूक करने के उद्देश्य से जनपहल रेडियो कार्यक्रम प्रत्येक बुद्ववार को ऑल इण्डिया रेडियो तथा एफ.एम. रेडियो स्टेशन से सुबह 11:30 बजे एवं विविध भारती से सुबह 10:45 बजे प्रसारण किया जा रहा है।
      प्रदेश के समस्त परिषदीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक एवं कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में विद्यालय प्रबन्ध समिति के समस्त सदस्यों को उनके कर्तव्यों एवं दायित्वों की जानकारी देने के उद्देश्य से विद्यालय स्तर पर विद्यालय प्रबन्ध समिति के सदस्यों का एक दिवसीय प्रशिक्षण किया गया है। विद्यालय प्रबन्ध समिति के सदस्यों को प्रशिक्षण हेतु जनपहल प्रशिक्षण मॉड्यूल एवं विद्यालय प्रबन्ध समिति के सदस्यों को जनपहल हस्तपुस्तिका उपलब्ध करायी गयी है।
      प्रदेश के समस्त परिषदीय विद्यालयों एवं कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में एजेण्डावार बैठक की कार्यवाही प्रत्येक माह आयोजित करते हुए, विद्यालय प्रबंध समिति द्वारा एस.एम.सी. बैठक रजिस्टर में अंकित किया जाना है, इस उद्देश्य से विद्यालयों को विद्यालय प्रबंध समिति बैठक रजिस्टर उपलब्ध कराया गया है।

शुक्रवार, जून 26, 2020

मानसून


ज़ख़्मों को कुरेदता नहीं,
अपने आप सहल जाते हैं,
हरे तो जख़्म हैं,
मरे पर न कोई नाम,
अनजाने में,
स्मृति हो जाती हैं,
अपने बीते अतीत की,
जख़्म कहो या,
बीते का फल,
अपनी उम्र में किये,
कर्मों का फल,
उस दोस्त को,
उस दोस्ती का,
एहसास होगा,
बीती दोस्ती का,


मानसून के आने से,
पनप जाती हैं मौसमी घास,
पतझड़ के आने से ही,
आती है बहार बसन्त की,
ज़ख़्मों को कुरेदने से,
आती है याद,
ज़ख़्मों के होने के दिनों की,
दरिया के सूख़ जाने से,
आती है याद,
वर्षा के होने के दिनों की,
निर्वात में पड़ा हो मन,
उठ आती है तरंग,
याद आने से,
ज़ख़्म याद रहता है,
तन पर एक दाग़ लग जाने से,
मन डूब जाता है,
बिसरे हुए ज़माने की याद आने से।