रविवार, जून 14, 2020

विभाजन का दर्द


विभाजन पर हजारों किताबें लिखी जा चुकी हैं और लिखी जायेंगी। एक मुद्दा जो हमेशा सवालों के घेरे में रहता है, वह है विभाजन - क्यों हुआ, कब हुआ, कैसे हुआ, किस लिए हुआ, कौन करते हैं, और उसका संकीर्ण सा जवाब मिलेगा, हालात ही ऐसे थे लोग करते भी तो क्या करते? शायद यह जवाब नहीं हो सकता। 

इस पर अपनी किताब “पागलपन का समय: विभाजन का एक संस्मरण” (A Time of Madness: A Memoir of Partition) में सलमान रशीद लिखते है-  उसके परिवार को जो भयानक भाग्य मिला, वह कई अन्य लोगों द्वारा साझा किया गया था। उनका अपना परिवार, जिसमें उनके दादा-दादी, उनकी दादी के पिता और उनकी दो मौसी शामिल थीं, वे एक हताहत थे, लाखों में से एक परिवार के लोग जिन्होंने अपनी जान गंवाई। और उनके अपने माता-पिता और चाची और चाचा, जो अपने जीवन को बचाने और नई भूमि में नए जीवन का निर्माण करने में कामयाब रहे थे। मानव आबादी का सबसे बड़ा स्थानान्तरण, जिसमें दर्द, बिछड़ना, मौत, प्यार, लालच, कब्जा, आदि सब हैं।

लेखक के परिवार ने किन हालातों में अपने घर और जन्म स्थान को छोड़कर पलायन किया और बचपन में परिवार के बुजुर्गों द्वारा बताया गया कि जालंधर में उनका क्या-क्या छूट गया है। शायद लेखक अपने परिवार के अस्तित्व को खोजने की उम्मीद करता है इस कहानी में, उसकी तड़फ अब एक परिवार की कहानी नहीं बल्कि उन लोगों की भी जिन्होंने अतीत में अपनों को विभाजन में खोया है। विभाजन के समय में मानवता का खूब खून-खराब हुआ विभाजन के कारणों पर भी अपनी टिप्पणी करता है साथ ही यह भी बताता है कि आज 70 साल के बाद दोनों देशों में काफ़ी कुछ बदलाव हुए है जो आपको एक देश की सीमा से दूसरे देश में दाखिल होते ही महसूस होने लगता है इसमें बाज़ार की भी अहम भूमिका है।

सलमान राशिद ने अपनी किताब में बड़ी मार्मिकता के साथ वक़्त की मार जब लोगों पर पड़ती है तो सबको अपना हर काम दुरुस्त लगता है दूसरे द्वारा की गई हर बात उनके खिलाफ़, इसमें राजनीति, सामाजिक ढाँचा, आर्थिक और अवसरवाद भी शामिल है। लेखक ने इस किताब में अपने यात्रा व्रतांत लिखने के कौशल का बखूबी इस्तेमाल किया है, जिसमें इतिहास, वर्तमान हालत, यात्रा और तथ्यों के साथ-साथ लोगों से हुई बातचीत को शब्दों में इस तरह पिरोया है कि एक उम्दा किताब बन गई है। देश के बटवारे और लोगों के विस्तापन तथा विभाजन में रुचि रखने व्यक्तियों को पुस्तक ज़रूर पढ़नी चाहिए।



कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Please do not enter any span link in the comment box.