सोमवार, जून 08, 2020

मिशन प्रेरणा

उत्तर प्रदेश में प्रारंभिक शिक्षा को सशक्तगुणवत्तापूर्ण और प्रभावशाली बनाने के उददेश्य एवं बेसिक शिक्षा के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु शासनादेश संख्या-783/68-5-2019 दिनांक 02 सितम्बर, 2019 द्वारा महत्वाकांक्षी और दूरदर्शी “प्रेरणा” तकनीकी फ्रेमवर्क की शुरुआत की गयी। मिशन प्रेरणा में आधारभूत संरचनाकक्षा-कक्ष की गतिविधियाँसीखने-सिखाने के तरीकोंछात्र-छात्राओं को बुनियादी सुविधाओं के साथ-साथ स्कूल में समावेशी वातावरण बनाने के लिए शिक्षकों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। प्रारंभिक शिक्षा के लिये एक मिशन है।

मिशन प्रेरणाबेसिक शिक्षा विभागउत्तर प्रदेश का प्रमुख कार्यक्रम हैजिसमें एक लाख साठ हज़ार प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार किया गया है। मिशन को मूलभूत शिक्षण कौशल पर विशेष ध्यान देने के साथ शुरू किया गया हैजो बच्चों की समझ के साथ पढ़ने और गणित की बुनियादी गणना करने की क्षमता को बढ़ाता हैजो उनके भविष्य के सभी सीखने का आधार बनता है। मिशन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्रेड 1-5 के सभी छात्र मार्च 2022 तक मूलभूत शिक्षा प्राप्त करें। इस पूरे मिशन का केंद्रीय बिन्दु शिक्षक हैं। यह मिशन प्रदेश के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है और विभाग के लिए अत्यंत आवश्यक है। विभाग की प्रतिष्ठा इस बात पर टिकी हुई है कि Class Room में मिशन प्रेरणा के विभिन्न घटकों को कैसे लागू किया जाता है। मिशन प्रेरणा के अंतर्गत प्रशासनिक सुधारशैक्षणिक सुधार और सुधारों को सक्षम करना है।मिशन प्रेरणा की शुरुआत दिनांक 5 सितंबर 2019 को हुई। 
 मिशन प्रेरणा का लक्ष्य
मिशन प्रेरणा का लक्ष्य है कि मार्च, 2022 तक 80 प्रतिशत बच्चों तथा प्रत्येक विकास खण्ड द्वारा फाउण्डेशन लर्निंग गोल्स प्राप्त करते हुए “प्रेरक विकास खण्ड”, “प्रेरक जनपद” एवं “प्रेरक मण्डल” का लक्ष्य प्राप्त किया जाना है।
मिशन प्रेरणा के घटक 
’’मिशन प्रेरणा’’ के मुख्य घटक निम्नवत हैं-
Ø  शिक्षा के अधिगम स्तर में वृद्धि हेतु नियमित अन्तराल पर त्रैमासिक परीक्षाओं के माध्यम से छात्र-छात्राओं के लर्निंग आउटकम का आंकलन करना।
Ø  परीक्षा के आधार पर विद्यालयवार रिपोर्ट कार्ड तैयार करना।
Ø  बच्चों का रिपोर्ट कार्ड अभिभावकों को प्रेषित करना।
Ø शैक्षणिक संसाधन व्यक्ति (Academic Resource Person- ARP) द्वारा सहायक पर्यवेक्षण (Supportive Supervision) के माध्यम से शिक्षकों की क्षमता-वृद्धि हेतु प्रोत्साहन एवं उत्साहवर्धन करना।
Ø कक्षा-कक्ष का वातावरण सुधारने एवं आकर्षक बनाने के लिये शिक्षण अधिगम सामग्री (TLM), कार्यपुस्तिका (Workbook), समृद्ध प्रिंट सामग्री (Print Rich Material), आदि उपलब्ध कराना।
Ø  प्रेरणा-तालिका के माध्यम से विद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता का अनुश्रवण करना।
Ø स्वतंत्र बाह्य संस्था (Independent external organization) के माध्यम से विद्यालयों का सत्यापन कराते हुए विकास खण्ड को प्रेरणा विकास खण्ड के रूप में घोषित करना।
Ø टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देनायथा- दीक्षा ऐप का उपयोगविद्यालयों में स्मार्ट क्लासेज विकसित करनाआदि।
Ø  प्रत्येक विद्यालय के कक्षा-कक्षों में पुस्तकालय और लाइब्रेरी कार्नर की स्थापना करना।
Ø  समस्त शिक्षकों को निष्ठा प्रशिक्षण कार्यक्रम के अन्तर्गत प्रशिक्षित करना।

Ø नियमित परीक्षायें :  छात्र-छात्राओं के लर्निंग आउटकम्स के आधार पर विषयवार अधिगम आंकलन एवं मूल्यांकन हेतु प्रत्येक त्रैमास ‘‘स्कूल लेवल असेसमेन्ट टेस्ट‘‘ आयोजित कराये जाने की व्यवस्था की गयी है।
Ø फाउण्डेशन लर्निंग गोल्स एवं मूल्यांकन :  कक्षा-से 5 के बच्चों में गणित एवं भाषा में अपेक्षित अधिगम स्तर सुनिश्चित करने के लिए मिशन प्रेरणा हेतु फाउण्डेशन लर्निंग गोल्स निर्धारित किये गये हैं।
Ø प्रेरणा तालिका : फाउण्डेशन लर्निंग गोल्स को त्रैमासिक लक्ष्य के रूप में विभाजित करते हुए प्रेरणा तालिका में अंकित करना। 
Ø सपोर्टिव सुपरविजन :  प्रत्येक जनपद के समस्त विकास खण्ड में 05 एकेडमिक रिसोर्स पर्सन (ए0आर0पी0) एवं 01 डायट मेंटर की व्यवस्था की गयी है।
Ø निष्ठा प्रशिक्षण कार्यक्रम :  शिक्षकों में क्षमता वृद्धि किये जाने हेतु प्रदेश के समस्त विकास खण्डों में निष्ठा प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना।
Ø दीक्षा ऐप का प्रयोग :  दीक्षा ऐप के माध्यम से शिक्षकों के लिए अतिरिक्त डिजिटल शिक्षण सामग्री उपलब्ध करना।
Ø पुस्तकालय का उपयोग:  बच्चों में पढ़ने के प्रति रूचि विकसित करने के उद्देश्य से सभी विद्यालयों में लाइब्रेरी विद रीडिंग कार्नर स्थापित करते हुये पुस्तकालय का उपयोग करना।
क्या सीखने-सीखने के लिए उठाए जा रहे कदम प्रारम्भिक शिक्षा को सशक्त कर पाएंगे या नहीं?

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