शनिवार, जून 27, 2020

विद्यालय प्रबन्ध समिति


विद्यालय प्रबन्ध समिति की संरचना कैसी है?
शिक्षा के अधिकार में समुदाय की सक्रिय भागीदारी की परिकल्पना की गयी है। विद्यालय प्रबंध समिति के माध्यम से अभिभावकों की विशेष भूमिका और दायित्व तय किये गये हैं। शिक्षक का दायित्व है कि विद्यालय प्रबंध समिति के सदस्यों को समय-समय पर विद्यालय की कार्यप्रणाली और विभिन्न प्रावधानों, आदि पर जागरूक करें और जोड़ने का प्रयास करें जिससे विद्यालय में एक बेहतर प्रबंधन व्यवस्था से संबंधित मुद्दों पर काम करने के लिये विद्यालय प्रबंध समिति एवं शिक्षक एक साथ मिलकर काम कर सकें।
संरचना एवं गठन
निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 21 के तहत प्रत्येक विद्यालय में एक विद्यालय प्रबन्ध समिति गठित की जाएगी। उत्तर प्रदेश निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार नियमावली, 2011 के अनुसार समिति में कुल 15 सदस्य होगें। 15 सदस्यों में से 11 सदस्य विद्यालय में दाखिला प्राप्त बच्चों के माता-पिता होगें और चार नामित सदस्य होगें। समिति के कुल सदस्यों में से कम से कम 50 प्रतिशत महिलाएं होंगी।
चार नामित सदस्य निम्नलिखित होगें-
1.    स्थानीय प्राधिकारी (पंचायत) द्वारा नामित सदस्य,
2.    एक सदस्य सहायक नर्स एवं मिड वाईफ (ए0एन0एम0),   
3.    एक लेखपाल (जिला मजिस्ट्रेट द्वारा नामित)
4.    विद्यालय के प्रधानाध्यापक विद्यालय प्रबन्ध समिति के सचिव।
Ø  विद्यालय प्रबंध समिति के 11 सदस्यों में एक-एक सदस्य अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जन जाति, अन्य पिछडा वर्ग तथा कमजोर वर्ग के बालक के माता-पिता होंगे।  
Ø  विद्यालय के शिक्षक विद्यालय क्षेत्र के दायरे में सभी अभिभावकों की खुली सभा में भागीदारी के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार करेगें व बैठक का स्थान, दिनांक तय करें। बैठक के दिन सभी अभिभावकों को बैठक के उद्देश्य बताते हुए विद्यालय प्रबंध समिति सम्बन्धी शासनादेश के प्रमुख बिन्दुओं से अवगत करायेगें।
Ø  विद्यालय प्रबंध समिति के 11 सदस्यों का बैठक में आम सहमति से चुनाव किये जाने के उपरान्त, चयनित 11  सदस्यों द्वारा अपने साथियों में से एक अध्यक्ष एवं एक उपाध्यक्ष का चुनाव आपसी सहमति से करेगें।
Ø  विद्यालय प्रबन्ध समिति समुदाय के अपवंचित वर्गों, यथा- महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, मजदूर, किसान, पिछड़ों को समुचित प्रतिनिधित्व दिया जाएगा।
Ø  प्रारम्भिक शिक्षा के विकास में अभिरुचि रखने वाले समर्पित एवं समय देने वाले व्यक्तियों को इसमें शामिल होने का अवसर दिया जाएगा।
Ø  विद्यालय प्रबंध समिति की बैठकों  में गांव में निवासरत् सेवानिवृत्त शिक्षक अथवा अन्य विभाग से सेवानिवृत्त अधिकारी/कर्मचारियों को सम्मिलित किया जाय जिससे विद्यालय के विकास में उनका महत्वपूर्ण योगदान लिया जा सके।    
विद्यालय प्रबन्ध समिति का कार्यकाल कितने वर्ष का होता है?
Ø  विद्यालय प्रबंध समिति का कार्यकाल दो वर्ष का होता है। दो वर्ष बाद समिति का पुनर्गठन किया जायेगा।
Ø  प्रत्येक वर्ष विद्यालय प्रबन्ध समिति के अभिभावक सदस्यों को (बच्चों द्वारा विद्यालय छोड़ने की स्थिति में) शामिल करने हेतु अद्यतन किया जायेगा।
Ø  विद्यालय प्रबन्ध समिति के अध्यक्ष बदल जाने की स्थिति में अथवा प्रधानाध्यापक के स्थानान्तरण की स्थिति में खाता संचालन में यथा आवश्यक संशोधन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की अनुमति से किया जायेगा।
विद्यालय प्रबंध समिति के कार्य क्या-क्या होय है?
Ø  06 से 14 वर्ष के सभी बालक/बालिकाओं का शत-प्रतिशत नामांकन एवं नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना।
Ø  यह सुनिश्चित करना कि सभी अध्यापक और छात्र विद्यालय में नियमित रूप से समय पर आये।
Ø  विद्यालय न जाने वाले तरीकों के बारे में जानकारी लेना और देखरेख करना।  
Ø  विद्यालय से बाहर के बच्चों का आयु संगत कक्षा में नामांकन कराना तथा ऐसे बच्चों के लिए विशेष प्रशिक्षण की व्यवस्था करना और इसकी गुणवत्ता की देखरेख करना।
Ø  विद्यालयों में नामांकन बढ़ाने हेतु ग्राम प्रधान, विद्यालय प्रबन्ध समिति, माँ समूह एवं स्थानीय लोगों का सहयोग प्राप्त करना।
Ø  विशेष प्रशिक्षण की व्यवस्था हेतु विद्यालय के प्रधानाध्यापक तथा विद्यालय प्रबन्ध समिति के अध्यक्ष की जिम्मेदारी है।  
Ø  विद्यालय प्रबन्ध समिति की मासिक बैठक में विशेष प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे बच्चों की उपस्थिति पर विचार-विमर्श विशेष रूप से किया जाये और अनियमित रूप से उपस्थित रहने वाले बच्चों को, नियमित रूप से विद्यालय भेजने हेतु विद्यालय प्रबन्ध समिति का सहयोग लिया जाये।
Ø  इस सम्बन्ध में विद्यालय प्रबन्ध समिति की बैठक की कार्यवाही रजिस्टर में अनिवार्य रूप से दर्ज़ की जाये।
Ø  बच्चों को बिना भेदभाव व भय के शिक्षा का अधिकार न मिलने पर स्थानीय प्राधिकारी को सूचित करना। 
Ø  विशिष्ट आवश्यकता वाले (दिव्यांग) बच्चों का नामांकन कराना तथा प्रारम्भिक शिक्षा पूरी होने तक इनकी सुविधाओं एवं भागीदारी की देखरेख करना।
Ø  यह सुनिश्चित करना कि अध्यापक अभिभावकों की नियमित बैठक कर बच्चों की उपस्थिति एवं सीखने की प्रगति के बारे में उन्हें बतायें।
Ø  मध्याह्न भोजन की नियमितता एवं गुणवत्ता का ध्यान रखना।
Ø  बच्चों के अधिकार एवं शिक्षा का अधिकार अधिनियम के बारे में आस-पास के लोगों को बताना तथा विद्यालय में अधिनियम के मानक के अनुसार सुविधाएं एवं कार्य हों, इसकी देखरेख करना।
Ø  अध्यापकों पर जनगणना, चुनाव, आपदा राहत को छोड़कर अन्य गैर सरकारी कार्यों का भार न हो।
Ø  विद्यालय को मिलने वाले अनुदान का सही तरीके से उपयोग किया जाए, इसकी देखरेख करना तथा विद्यालय प्रबन्ध समिति को मिलने वाली धनराशि का अलग से हिसाब-किताब रखना।
Ø  शासन के पत्र संख्या 2223/79-5-2012-29/09 टी.सी.-11 दिनांक 6 जुलाई 2012 के अनुसार विद्यालय प्रबन्ध समिति के अध्यक्ष एवं पदेन सदस्य सचिव (प्रधानाध्यापक) के हस्ताक्षरों से संयुक्त खाते का संचालन करना, तथा टीचर ग्रान्ट, निर्माण कार्य, मेन्टेनेन्स ग्रान्ट, विद्यालय ग्रान्ट, यूनिफार्म एवं अन्य कार्यो पर व्यय विद्यालय प्रबन्ध समिति के माध्यम से ही वित्तीय नियमों के अनुसार करना। 
Ø  तीन साल के लिए विद्यालय विकास योजना बनाना एवं योजना को अध्यक्ष/उपाध्यक्ष एवं सदस्य सचिव के हस्ताक्षर के साथ सम्बन्धित प्राधिकारियों के पास भेजना।
Ø  प्रत्येक माता-पिता या अभिभावक का यह कर्तव्य होगा कि वह अपने बच्चे या आश्रित का दाखिला पड़ोस के विद्यालय में कराये या कराने के लिए तैयार रहे, बच्चों को नियमित  विद्यालय भेजें, 3 वर्ष से अधिक और 6 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को जिस विद्यालय में पूर्व प्राथमिक शिक्षा का प्रबंध हो, वहाँ अपने बच्चों की देखभाल एवं पूर्व प्रारंभिक शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से दाखिला कराये और उपरोक्त के अतिरिक्त, विद्यालय प्रबंधन में सहयोग दें।
विद्यालय प्रबन्ध समिति का गठन कैसे होता है?
Ø  विद्यालय क्षेत्र के सभी अभिभावकों की खुली सभा में भागीदारी के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए।
Ø  पंचायत प्रतिनिधि व प्रधान, स्थानीय प्राधिकारी द्वारा विद्यालय क्षेत्र के दायरे में मुनादी के माध्यम से सभी को सूचित किया जाए।
Ø  बच्चों द्वारा उनके माता-पिता की भागीदारी हेतु संदेश भिजवाना जाए, जिसके लिए बच्चों की कॉपी में लिखकर संदेश भिजवाये और उस पर माता-पिता के हस्ताक्षर करा कर मंगावाये।
Ø  बैठक प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय के परिसर में ही रखी जाय।
Ø  यदि विद्यालय परिसर में स्थान कम हैं तो किसी भी सार्वजनिक स्थान का बैठक हेतु चयन किया जा सकता है।
Ø  बैठक की तिथि और समय का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाय जिससे बैठक में सभी वर्गों की सहभागिता सुनिश्चित हो सके।
Ø  प्रधानाध्यापक द्वारा विद्यालय प्रबन्ध समिति के गठन हेतु आयोजित बैठक का उद्देश्य सभी को बताया जाय।
Ø  विद्यालय प्रबंध समिति के गठन सम्बन्धी शासनादेश के प्रमुख बिन्दुओं से अवगत कराना।
Ø  सभी अभिभावक मिलकर 11 सदस्यों का चयन करेंगे। चयनित सदस्यों में से एक अध्यक्ष एवं एक उपाध्यक्ष का चयन करेंगे।
Ø  अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष में से एक महिला होना अनिवार्य है।
विद्यालय प्रबन्ध समिति की बैठक माह में कम से कम एक बार अनिवार्य रूप से आयोजित की जायेगी तथा बैठक की कार्यवाही एवं लिये गये निर्णयों को विद्यालय प्रबन्ध समिति बैठक रजिस्टर में अवश्य लिखा जाए। यह भी सुनिश्चित कर लिया जाए कि बैठक में उपस्थित सभी सदस्यों के हस्ताक्षर रजिस्टर में कराये जायें।
Picture form Sitapur


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